नवरात्रि · दिन 6
कात्यायनी
महिषासुरमर्दिनी योद्धा देवी
जय अम्बे गौरी (दुर्गा आरती)
जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी। तुमको निशिदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी॥
ॐ जय अम्बे गौरी॥
मांग सिन्दूर विराजत, टीको मृगमद को। उज्ज्वल से दोउ नैना, चन्द्रवदन नीको॥
ॐ जय अम्बे गौरी॥
कनक समान कलेवर, रक्ताम्बर राजै। रक्तपुष्प गल माला, कण्ठन पर साजै॥
ॐ जय अम्बे गौरी॥
केहरि वाहन राजत, खड्ग खप्पर धारी। सुर-नर मुनिजन सेवत, तिनके दुखहारी॥
ॐ जय अम्बे गौरी॥
कानन कुण्डल शोभित, नासाग्रे मोती। कोटिक चन्द्र दिवाकर, राजत सम ज्योति॥
ॐ जय अम्बे गौरी॥
शुम्भ निशुम्भ बिदारे, महिषासुर घाती। धूम्र विलोचन नैना, निशिदिन मदमाती॥
ॐ जय अम्बे गौरी॥
चण्ड मुण्ड संहारे, शोणित बीज हरे। मधु कैटभ दोउ मारे, सुर भयहीन करे॥
ॐ जय अम्बे गौरी॥
ब्रह्माणी रुद्राणी तुम कमला रानी। आगम निगम बखानी, तुम शिव पटरानी॥
ॐ जय अम्बे गौरी॥
चौंसठ योगिनी गावत, नृत्य करत भैरू। बाजत ताल मृदंगा, अरु बाजत डमरू॥
ॐ जय अम्बे गौरी॥
तुम ही जग की माता, तुम ही हो भर्ता। भक्तन की दुख हर्ता, सुख सम्पत्ति कर्ता॥
ॐ जय अम्बे गौरी॥
भुजा चार अति शोभित, वर मुद्रा धारी। मनवांछित फल पावत, सेवत नर नारी॥
ॐ जय अम्बे गौरी॥
कंचन थाल विराजत, अगर कपूर बाती। श्रीमालकेतु में राजत, कोटि रतन ज्योति॥
ॐ जय अम्बे गौरी॥
श्री अम्बे जी की आरती, जो कोई नर गावे। कहत शिवानन्द स्वामी, सुख सम्पत्ति पावे॥
ॐ जय अम्बे गौरी॥
देवी के बारे में
दुर्गा का छठा रूप। महर्षि कात्यायन की पुत्री के रूप में प्रकट होने के कारण वे कात्यायनी कहलाईं। यह वह योद्धा रूप है जिसने महिषासुर का वध किया। वे सिंह पर सवार हैं और खड्ग तथा कमल धारण करती हैं। परम्परा में कात्यायनी की पूजा साहस और अविवाहित कन्याओं के लिए सुयोग्य वर की कामना से जुड़ी है।
भोग: शहद
इसे अपना बनाएँ
वैकल्पिक। आपका नाम और गोत्र संकल्प में भर जाएगा। केवल इसी डिवाइस पर सहेजा जाता है।
पूजा सामग्री
- देवी की तस्वीर या मूर्ति
- लाल वस्त्र (चुनरी) और स्वच्छ आसन
- रोली / कुमकुम, अक्षत
- लाल फूल (गुड़हल देवी को प्रिय है), माला
- अगरबत्ती / धूप, कपूर
- घी या तेल का दीपक, बत्तियाँ
- कलश या छोटे पात्र में जल, आम के पत्ते
- फल, नारियल और उस दिन का भोग
- भोग: शहद
पूजा विधि (चरण)
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शुद्धि और तैयारी
स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें। पूजा स्थान साफ करें और लाल वस्त्र बिछाएँ। पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें और देवी की तस्वीर या मूर्ति सामने रखें।
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संकल्प
दाहिने हाथ में जल, थोड़े अक्षत और एक फूल लेकर संकल्प बोलें, फिर जल छोड़ दें। नीचे आपका गोत्र और नाम आपकी सहेजी गई पसंद से भरा जाता है।
मम (आपका गोत्र)-गोत्रे उत्पन्नस्य (आपका नाम)-नाम्नः ममोपात्त-समस्त-दुरित-क्षयद्वारा श्रीदुर्गा-प्रीत्यर्थं नवरात्र-पूजनमहं करिष्ये॥
mama (आपका गोत्र)-gotre utpannasya (आपका नाम)-nāmnaḥ mamopātta-samasta-durita-kṣaya-dvārā shrī-durgā-prītyarthaṃ navarātra-pūjanam ahaṃ kariṣye ||
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गणेश वन्दना
विघ्न दूर करने के लिए सबसे पहले श्री गणेश को प्रणाम करें।
वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥
vakratuṇḍa mahākāya sūryakoṭi samaprabha | nirvighnaṃ kuru me deva sarvakāryeṣu sarvadā ||
अर्थ: हे वक्रतुण्ड, विशाल देह वाले, करोड़ सूर्यों के समान तेजस्वी देव, मेरे सभी कार्यों को सदा विघ्नरहित करें।
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दीप प्रज्वलन और अर्पण
दीपक और धूप जलाएँ। देवी को रोली, अक्षत, फूल और माला अर्पित करें।
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ध्यान मन्त्र
क्षण भर नेत्र बन्द करके माँ कात्यायनी के ध्यान मन्त्र का पाठ करें।
चन्द्रहासोज्ज्वलकरा शार्दूलवरवाहना। कात्यायनी शुभं दद्यादेवी दानवघातिनी॥
chandrahāsojjvala-karā shārdūla-vara-vāhanā | kātyāyanī shubhaṃ dadyād devī dānava-ghātinī ||
अर्थ: जिनका हाथ चन्द्रहास खड्ग से उज्ज्वल है, जो श्रेष्ठ सिंह पर सवार हैं और दानवों का संहार करती हैं, वे देवी कात्यायनी मुझे शुभ फल दें।
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स्तुति
देवी की स्तुति का पाठ करें।
या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
yā devī sarvabhūteṣu shakti-rūpeṇa saṃsthitā | namastasyai namastasyai namastasyai namo namaḥ ||
अर्थ: जो देवी सब प्राणियों में शक्ति रूप से स्थित हैं, उन्हें बारम्बार नमस्कार है।
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भोग अर्पण
माँ कात्यायनी को शहद का भोग फल और नारियल के साथ अर्पित करें।
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आरती
जलते दीपक या कपूर को देवी के सामने दक्षिणावर्त (घड़ी की दिशा में) घुमाते हुए आरती गाएँ।
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क्षमा प्रार्थना
पूजा में हुई किसी भी भूल के लिए क्षमा माँगें।
आवाहनं न जानामि न जानामि विसर्जनम्। पूजां चैव न जानामि क्षमस्व परमेश्वरि॥
āvāhanaṃ na jānāmi na jānāmi visarjanam | pūjāṃ caiva na jānāmi kṣamasva parameshvari ||
अर्थ: मैं न आवाहन जानता हूँ, न विसर्जन, न ही पूजा की विधि। हे परमेश्वरी, मुझे क्षमा करें।
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प्रसाद वितरण
प्रसाद परिवार और पड़ोसियों में बाँटें, फिर स्वयं ग्रहण करें।